Friday, October 19, 2007

सीताराम कहिये !

सीताराम सीताराम सीताराम कहिये,
जाहीं विधि रखे राम, ताहिं विधि रहिये !

मुख में हो राम नाम राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नही प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान हानि लाभ सहिए,
जाहीं विधि रखे राम, ताहिं विधि रहिये !

किया अभिमान तो फिर मान नही पायेगा,
होगा प्यारे वही जो श्रीराम जी को भायेगा,
फल आशा त्याग शुभ काम करते रहिये,
जाहीं विधि रखे राम, ताहिं विधि रहिये !

ज़िंदगी कि डोर सौंप हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद, निर्विवाद राम राम कहिये,
जाहीं विधि रखे राम, ताहिं विधि रहिये !

आशा एक रामजी से दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक रामजी से दूजा नाता छोड़ दे,
साधू संग राम रंग अंग अंग रंगिये,
जाहीं विधि रखे राम, ताहिं विधि रहिये !

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